जोर भी है मेरे पांव में - कहाँ जान पाया लाश की नक़ल उतारने में
और जीने की चाह करते करते भूल गया की - मैं जीवित हूँ
जाने किसकी नसीहत थी
या ज़द्दोज़हद में बहने की होर
थी शायद दूसरों की नज़र से खुद को पढने की भूल.
लाश हूँ, लेकिन खून गर्म है मेरा
लाश हूँ, लेकिन खून गर्म है मेरा
कमबख्त इतना गर्म भी नहीं की उबाल आ जाये
और फूट पड़े नशों से .
जो जान पाऊं -उत्तकों में बसे काबिलियत को अपनी
तो बनाने वाले -धन्यवाद् कह दूं तुम्हे मैं .
और जीने की चाह करते करते भूल गया की - मैं जीवित हूँ
जाने किसकी नसीहत थी
या ज़द्दोज़हद में बहने की होर
थी शायद दूसरों की नज़र से खुद को पढने की भूल.
लाश हूँ, लेकिन खून गर्म है मेरा
लाश हूँ, लेकिन खून गर्म है मेरा
कमबख्त इतना गर्म भी नहीं की उबाल आ जाये
और फूट पड़े नशों से .
जो जान पाऊं -उत्तकों में बसे काबिलियत को अपनी
तो बनाने वाले -धन्यवाद् कह दूं तुम्हे मैं .