Sunday, July 27, 2014

हिन्दू की रक्षा इसकी सुदृढ जड़े कर लेगी

एक बार ग्रेग चैपल ने भारतीय सन्स्कृति के बारे मे यह कहा था की हम मुन्डेर पर सर इसलिये नही रखते क्योंकि हमें डर है की कोई गोली ना चला दे और इसलिये हमे सर झुकाने की आदत हो गई है|

... इनटरनेट के इस युग में फेसबुक पर भी पाखंड और सदियों पुरानी सड़ी आडम्बर को ढोते कुछ युवाओं के लिखे को पढता हूँ तो यदा कदा ग्रेग की बाते याद आ जातीं हैं|
उदाहरण के लिए-हिन्दू रक्षा दल या ब्राह्मण सेना| अपनी सड़ती अंगों को न देख इससे उठती बदबू को दूसरी ओर से आता समझ दौड़ पड़ते है| जनाब हिन्दू की रक्षा इसकी सुदृढ जड़े कर लेगी आप अपना घर देखिये |

Friday, July 25, 2014

Contribution of India to the UN peacekeeping forces

After Bangladesh, India is the largest contributor of soldiers and police personnel to the UN peacekeeping forces. According to officials, those troops are being increasingly pushed into conflicts of active or “robust” fighting, rather than monitoring peace.

In December 2013, five Indian soldiers were killed fighting rebels in South Sudan. The UN Undersecretary-General said he found such situations “unacceptable”, and also criticized the “global north” (US and Europe) for not contributing enough to the forces. “Ninety-five per cent of the peacekeepers are from the (global) South,” Mr. Ladsous explained, “And the North (Europe, U.S. among others) only contributes five per cent to the UNPKF. That is not sustainable and I have been telling NATO, EU countries, when you pull out of Afghanistan this year, you must come back in a more significant way to the UNPKF.”

Courtesy: The Hindu

बुधवार, जुलाई ९, २०१४ - "पीज़ा हट" के रेस्त्रां में

ये इंटीरियर डिज़ाइन वाले साधारण से साधारण चीजों को दीवारों पर इस क़दर टांग देते हैं की अच्छा ही लगता है।
आज हमारे टीम लीडर सत्या ने 'पीज़ा हट' में, अमेरिका जाने की ख़ुशी में, पूरे टीम को दावत दी।
वहीं देखा - प्लास्टिक के पारदर्शी परातों को काले रंग से रंग कर सतह पर कोई चित्र आंका गया हो और फिर पीछे प्रचलित एल-ई-डी वाले बल्ब्स लगा कर दीवारों पर टांगा गया हो।

चमकने वाली कागज के प्लेटों पर कुछ और रंगीन कागज़ और रूई लगा कर जब भाभी कोई सजावट की चीजें बनातीं थीं तो मन में सोचा करता था - भला भाभी क्यों इन सब चीजों में अपना समय बरबाद करतीं हैं।
आज उसी प्रकार के सजावट के बनावटों को इन मॉलों के दीवारों पर देखता हूँ तो उस इंटीरियर डिज़ाइनर के बारे में सोचने लगता हूँ की - इन साधारण सी बनावटों के लिए उसने कितने पैसे लिए होंगे।

खैर यह तो हुई रेस्त्रां की सजावट बारे में। वहीँ बैठे बैठे सोचने लगा वहाँ काम करने वाले कर्मचारी, जो ग्राहक से आर्डर लेते और सर्व करते समय सीखे हुए विभिन्न तरह से इटालियन शब्दों का इस्तमाल करते हैं , इनके रहन सहन, घरेलु बोलचाल या इनके विचार में कितना फर्क आया होगा, यहाँ काम करते हुए।

क्योंकि जब थोड़ा ध्यान से देखता हूँ तो इन होम डिलीवरी करने वालों के ड्रेस के अंदर के कमीज मैले ही होते हैं , ये जो कमर में बेल्ट पहनते हैं वही इनके पैंट को इनके कमर से बंधे रखने का बीड़ा उठाते हैं. ये पिज़ा हट वाले अपने कर्मचारियों को बिना नाप के पैंट पहनाकर ऊपर से एक ओवरकोर्ट से ढंकवाकर अच्छी दिखावट तो कर देते हैं लेकिन उनके जीवन में कितना बदलाव लाते हैं - पता नहीं।
अपने गाँव बेगुसराय में शादियों में बैंड  बाजे वालों की टोली में मास्टर छोड़कर शायद की किसी का ड्रेस ढंग से बना हुआ होता है। चाहे बेगुसराय की क्रक धूम वालों की टीम हो या बैंगलोर के पिज़ा हट वालों के डिलीवरी की टीम - पीसने वाले वही हैं।

सत्या ने करीब ८०००  खर्च किये।
आज २६ जुलाई २०१४ को हमारे अमेरिकी ऑफिस के मैनेजर में हमारे काम से खुश होकर हमें पार्टी देने का वादा किया।  इन्हे भी करीब करीब ८०००  खर्च तो करना ही पड़ेगा अगर हम अपनी टीम मेम्बरों की सँख्या और आज की महँगाई को मद्देनज़र लाएँ  तो।

इन दोनों मौको पर अगर हम इन्ही रुपयों से, जो की १६००० के करीब होगी, कॉपियां खरीद कर सरकारी स्कूलों के बच्चों को बाँट दिए होते - कितनी मुस्कराहटें हमने खरीदी होती।

मैं केवल सोचता रह जाता हूँ।





शिथिल हो गए शरीर को तो बख्श दो।

हमारी जड़ से सड़ चुकी, विकृत से विकृत, अश्लील से अश्लील मानशिकता नहीं तो और क्या है जो हैवानियत से निर्जीव की जा चुकी नग्न शरीर के तस्वीरों को इतना फैला रहीं हैं या इतना वक़्त दे रही हैं ताकि तस्वीर उतरा जा सके।
तुम्हारी हैवानियत को सह चुकी, शिथिल हो गए शरीर को तो बख्श दो। 

१४ जुलाई २०१४

जनाब गिरिराज ने पैसे इकठ्ठा किये थे दुसरे दल  वाले को पाकिस्तान भेजने के लिए-उसे क्या पता था उसके खुद के दल वहाँ चले जायेंगे


१४ जुलाई २०१४ 

शेर के पाऊं में गद्दे लगे होते हैं।

फेसबुक पर सदैव न मो जाप करने वाले और कमल पर बटन दबा कर स्व गौरवान्वित होने वाले भक्त जन, उसके दाहिने के दाहिने हाथ के हाफ़िज़ से मिलने के खबर सुनने के बाद मुह में रसगुल्ला दबा कर चुप्पी की वजह ढूंढने वाले - जान लें - रसगुल्ले भी महंगे होने वाले हैं।
कितने चुप्पी।
खुनी के पाऊं तख़्त से होकर हमारे दरवाजे तक पहुँचने में देर नहीं करेंगे।
सुना हैं शेर के पाऊं में गद्दे लगे होते हैं।