हमारी जड़ से सड़ चुकी, विकृत से विकृत, अश्लील से अश्लील मानशिकता नहीं तो और क्या है जो हैवानियत से निर्जीव की जा चुकी नग्न शरीर के तस्वीरों को इतना फैला रहीं हैं या इतना वक़्त दे रही हैं ताकि तस्वीर उतरा जा सके।
तुम्हारी हैवानियत को सह चुकी, शिथिल हो गए शरीर को तो बख्श दो।
तुम्हारी हैवानियत को सह चुकी, शिथिल हो गए शरीर को तो बख्श दो।
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