आज सत्यमेव जयते का दूसरे सीज़न का पांचवा एपिसोड देखा। इस एपिसोड देखने के बाद भी अगर हम यह सोचते रहे कि परदे के आगे और पीछे के सच, ज़मीन और आसमान के मिलने जैसा होता है तो हमें रुक कर सोचने कि जरुरत है।
हमें अपने वोट के ताक़त पर बहुत ही गम्भीर हो कर सोचने कि जरुरत है। हमें बचना होगा उन ज़हरीली, साम्प्रदायिक और भ्रस्टाचारी हवाओं से जिसे आज कि घृणित राजनितिक पार्टिया हमारे ही पैसे से हमारे ही बीच फैला रही है।
इस ज़हर के हमारे जिस्म के खून तक पहुचने से हमें खुद ही रोकना होगा।
कॉंग्रेस और बीजेपी इन्ही संकुचित और ज़हरीली पार्टियों के नाम हैं।
आप यह सोचे कि 'अरे ये तो 'आप' समथक है ये तो ऐसे ही बकवास करेगा'
आप भले ही 'आप' को उचित ना समझे और वोट ना दें लेकिन अपने अधिकार का गलत प्रयोग न करें।
इन राजनितिक पार्टिओं का चरित्र भला किससे छिपा है।
मानवता का कोई विकल्प नहीं। अमानव कि कोई सफाई उचित नहीं।
मानव को वोट दें या 'NOTA' को चुने लेकिन कृपया कर के इन बलात्कारियों, हत्यारों, दम्भियों, घूसखोरों को न चुने और ना ही इन्हे सपोर्ट करने वाली पार्टियों को। ये अहम् फैसला हमें और केवल हमें लेना है वरना अगले पांच साल तक किसी को ना कोसना है।
हमें अपने वोट के ताक़त पर बहुत ही गम्भीर हो कर सोचने कि जरुरत है। हमें बचना होगा उन ज़हरीली, साम्प्रदायिक और भ्रस्टाचारी हवाओं से जिसे आज कि घृणित राजनितिक पार्टिया हमारे ही पैसे से हमारे ही बीच फैला रही है।
इस ज़हर के हमारे जिस्म के खून तक पहुचने से हमें खुद ही रोकना होगा।
कॉंग्रेस और बीजेपी इन्ही संकुचित और ज़हरीली पार्टियों के नाम हैं।
आप यह सोचे कि 'अरे ये तो 'आप' समथक है ये तो ऐसे ही बकवास करेगा'
आप भले ही 'आप' को उचित ना समझे और वोट ना दें लेकिन अपने अधिकार का गलत प्रयोग न करें।
इन राजनितिक पार्टिओं का चरित्र भला किससे छिपा है।
मानवता का कोई विकल्प नहीं। अमानव कि कोई सफाई उचित नहीं।
मानव को वोट दें या 'NOTA' को चुने लेकिन कृपया कर के इन बलात्कारियों, हत्यारों, दम्भियों, घूसखोरों को न चुने और ना ही इन्हे सपोर्ट करने वाली पार्टियों को। ये अहम् फैसला हमें और केवल हमें लेना है वरना अगले पांच साल तक किसी को ना कोसना है।