Friday, February 12, 2021

आग

मैंने ना कहा था,
इस उम्मीद में कि गिरफ़्त सख्त हो जाएगी उसकी,
कमबख्त जाने दिया उसने. 
और,
इस तरह आग की लपटों से मेरा सामना हुआ.

Tuesday, February 9, 2021

मशीन

उसने पूछा, "कैसे हो?"
मैंने कहा, "ठीक हूँ" 
और वो मान गया. 

उसने पूछा, "इस बार मेरे जन्मदिन पर क्या देने की सोचे हो?" 
मैंने कहा, "अभी तक कुछ सोचा नहीं है." 
उसने कहा, "कुछ सोने का चाहिए, थोड़ा बड़ा."

....

दो मशीन साँस लेते रहे, 
एक छत के नीचे.



--(Kisi aur Ka likha hua hai, pata nahi kiska)