इससे बड़ा पाखण्ड का भला और क्या प्रमाण होगा। आई एस वालों की क्रूरता पिछले कई महीनों से बदस्तूर ज़ारी है। लेकिन मुख्य धारा के मीडिया को यह तब कौंधा जब एक गोरा पत्रकार मारा गया। हाय तौबा तब मची।
पिछले कई महीनों से, आई एस शासित इलाके में, गैर मुस्लिमों को सरे आम मौत के घाट उतारा जा रहा है। न कोई देश खुलकर इसके खिलाफ बोल रहा ना कोई संगठन।
पिछले कई महीनों से, आई एस शासित इलाके में, गैर मुस्लिमों को सरे आम मौत के घाट उतारा जा रहा है। न कोई देश खुलकर इसके खिलाफ बोल रहा ना कोई संगठन।
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